Nitin Lakade
Prajapat Nagar, Indore (M.P.)
एक सज्जन की छोटी कहानी: एक रोटी की कीमत
गांव के किनारे पंडित रामप्रसाद जी रहते थे। उम्र 60 साल, लेकिन दिल 20 साल के जवान जैसा। पूरा गांव उन्हें "सज्जन" कहता था। उनके पास ज्यादा पैसा नहीं था, पर इज्जत बहुत थी।
सर्दी की रात और भूखा आदमी
दिसंबर की कड़ाके की सर्दी थी। रात के 9 बजे पंडित जी खाना खाकर सोने वाले थे। तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।
दरवाजा खोला तो सामने 25 साल का एक नौजवान खड़ा था। कपड़े फटे हुए, पैर नंगे, और ठंड से कांप रहा था।
वो बोला:
"बाबा... 2 दिन से कुछ नहीं खाया। क्या थोड़ा पानी मिल जाएगा?"
सज्जनता का फैसला
पंडित जी के पास उस समय अपनी और पत्नी के लिए सिर्फ 2 रोटी और थोड़ी सब्जी बची थी। पत्नी ने धीरे से कहा: "जी, कल सुबह का इंतजाम क्या होगा?"
पंडित जी मुस्कुराए और बोले:
"जिसका पेट आज खाली है, उसका कल कौन सोचेगा? भगवान किसी का पेट खाली नहीं रखता।"
उन्होंने थाली में से अपनी एक रोटी, पत्नी की एक रोटी और सारी सब्जी उस नौजवान को दे दी। साथ में एक पुरानी चादर भी ओढ़ा दी।
नौजवान की आंखें भर आईं। उसने कहा: "बाबा, मैं ये एहसान कभी नहीं भूलूंगा।"
6 महीने बाद...
6 महीने बाद गांव में मेला लगा। एक बड़ी गाड़ी आकर पंडित जी के घर के सामने रुकी। उसी नौजवान उतरा। अब उसने बढ़िया कपड़े पहने थे।
वो पंडित जी के पैरों में गिर पड़ा और बोला:
"बाबा पहचानो? मैं वही हूं जिसे आपने उस रात रोटी दी थी। उस दिन के बाद मैंने मेहनत की। आज मैं शहर में 10 लोगों को रोजगार देता हूं।"
उसने पंडित जी को 1 लाख रुपये और एक सम्मान पत्र दिया। बोला: "आपने मुझे एक रोटी दी थी। आज मैं आपको 1000 रोटी खिलाने लायक बना हूं।"
पूरा गांव ये देखकर कह उठा - "सच में, यही सज्जनता है।"
इस कहानी से 2 बड़ी सीखें
- इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है: आपके पास कम हो तब भी किसी की मदद करने से आप छोटे नहीं होते।
- अच्छाई का फल जरूर मिलता है: एक रोटी दी, तो भगवान ने 1000 रोटी का रास्ता खोल दिया।
Quiz: आपकी राय
अगर आपकी जगह पंडित जी होते तो क्या करते?
A. एक रोटी दे देते
B. मना कर देते क्योंकि कल का पता नहीं
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