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राजवाड़ा का आखिरी केस - संजू और नितिन की इंदौर सराफा मिस्ट्री | Indore 09

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  राजवाड़ा का आखिरी केस SANJU X NITIN | INDORE SARFA UNDERCOVER MISSION Right: नितिन (मैं) Left: संजू लोकेशन: इंदौर राजवाड़ा, सराफा बाजार टाइम: रात 2:13 AM इंदौर का सराफा बंद हो चुका था। बारिश होकर रुकी थी। राजवाड़ा की लाइटें पीली पड़ रही थीं। मैं नितिन और मेरा जिगरी दोस्त संजू काले सूट में राजवाड़ा के सामने खड़े थे। लोगों को लगा हम किसी फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं, पर असली कहानी कुछ और थी। 1. शर्मा किराना का काला बैग शाम को शर्मा किराना वाले ने हमें बुलाया। बोला - "नितिन भाई, पिछले 3 दिन से हर रात 2 बजे एक काली Ambassador (MP - INDORE नंबर प्लेट) मेरी दुकान के सामने आकर रुकती है, 2 मिनट में चली जाती है।" संजू ने बोला - "आज रात पकड़ते हैं!" "संजू, याद रखना... कार आते ही कोई हरकत मत करना, सिर्फ नंबर नोट करना है" - मैंने धीरे से कहा। 2. रात 2:13 बजे - वो आई! ठीक 2:13 पर वही काली Ambassador धुंए के साथ आई। इस फोटो वाली जगह पर रुकी। अंदर से कोई बाहर नहीं आया। सिर...

रात 12 बजे उस बंगले में 10 दोस्तों के साथ क्या हुआ? - खौफनाक सच्ची कहानी | Nitin Friends

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  🏚️👁️ रात 12 बजे उस बंगले में क्या हुआ? नितिन और उसकी गैंग की सबसे डरावनी रात उस रात मौजूद थे: ⭐ नितिन (मैं) पप्पू राहुल संजू वरुण सुभाष रितेश धीरज ओम पप्पू काला सुभाष की बर्थडे पार्टी खत्म होने के बाद हम 10 दोस्त बाइक से घर जा रहे थे। रात के 11:45 बज रहे थे। विजय नगर के पीछे वाले सुनसान रास्ते पर वरुण की बाइक पंचर हो गई। सामने एक पुराना, बंद पड़ा बंगला था। राहुल बोला - "चलो थोड़ी देर वहीं रुकते हैं।" पप्पू काला ने मना किया - "भाई, इस बंगले के बारे में बहुत कहानियां सुनी हैं!" 1. बंगले के अंदर मैं (नितिन) टॉर्च लेकर आगे बढ़ा। पीछे संजू, ओम और धीरज थे। बंगले का गेट अपने आप चर्र... करके खुल गया। अंदर घुप्प अंधेरा। पप्पू ने मजाक में कहा - "भूत होगा तो पप्पू काला से डर के भाग जाएगा!" "श...! आवाज सुनो..." - सुभाष ने फुसफुसा कर कहा। ऊपर वाले कमरे से किसी के चलने की आवाज आ रही थी। 2. 12 बजते ही... जैसे ही मेरे मोबाइल में 12:00 बजा, बंगले की स...

दोस्तों ने मिलकर पार्टी में धूम मचा दी - नितिन और उसकी गैंग की मजेदार कहानी | Nitin

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  दोस्तों ने मिलकर पार्टी में धूम मचा दी! 🎉 इंदौर - नितिन और उसकी गैंग की कहानी आज के हीरो: ⭐ नितिन (मैं) पप्पू राहुल संजू वरुण सुभाष रितेश धीरज ओम पप्पू काला विजय नगर में सुभाष की बर्थडे पार्टी थी। DJ लगा था, लाइटें चमक रही थीं, पर डांस फ्लोर खाली पड़ा था। सब लोग बिरयानी की प्लेट पकड़ कर कोने में खड़े थे। मैंने देखा, मेरी पूरी गैंग - पप्पू, राहुल, संजू, वरुण, रितेश, धीरज, ओम और पप्पू काला सब बोर हो रहे हैं। मैंने आँख मारी और बोला - "चलो, धूम मचाते हैं!" 1. प्लान बना वरुण DJ के पास गया और बोला "भाई 'काला चश्मा' लगा।" राहुल ने लाइट वाले को इशारा किया। संजू ने सब आंटियों को बोला "आंटी थोड़ा साइड हो जाओ, शो शुरू होने वाला है!" मैं (नितिन) बीच में आया और चिल्लाया - "भाईयो, खाना बाद में, पहले पप्पू का डांस!" 2. धमाका शुरू सबसे पहले पप्पू ने अपना पेट हिलाकर डांस शुरू किया, सब हँस-हँस के लोटपोट! फिर पप्पू काला ने अपना काला चश्मा पहना और ब्रे...

PRIVACY या परिवार? मुश्किल वक्त में कौन काम आता है? Nitin Lakade Indore

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PRIVACY या परिवार? एक लड़का था… बहुत खुश रहता था कि उसकी जिंदगी में किसी की दखल नहीं है। उसका कमरा अलग, उसका मोबाइल अलग, उसकी परेशानियाँ अलग… और उसकी एक ही सोच थी— “मेरी जिंदगी है, मुझे पता है मुझे क्या करना है।” पर एक दिन जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जब उसे सच में किसी अपने की जरूरत पड़ी। दोस्त व्यस्त थे… सोशल मीडिया पर सैकड़ों लोग जुड़े थे, लेकिन मुश्किल समय में फोन करने वाला कोई नहीं था। तभी उसकी नजर माँ पर पड़ी। माँ ने कुछ पूछा नहीं… बस उसके पास बैठ गई। भाई ने बिना किसी सवाल के हाथ पकड़ लिया। Privacy जरूरी है, लेकिन रिश्तों से दूरी बनाना समझदारी नहीं है। हर बात सबको बताना जरूरी नहीं, लेकिन ऐसा भी मत कीजिए कि मुश्किल वक्त में आपके पास अपना कहने वाला कोई न बचे। क्योंकि जिंदगी के अच्छे दिनों में बहुत लोग आपके साथ दिखाई देते हैं… लेकिन असली अपने वही हैं, जो आपके बुरे वक्त में बिना बुलाए आपके पास खड़े हो जाते हैं। सोचिए… आपकी Privacy के पीछे आपका अपना परिवार है, या आपकी Privacy ने आपको परिवार से ह...

10 दोस्त, 15 साल बाद एक तस्वीर - दोस्ती की असली कहानी | Nitin Lakade Indore

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  10 दोस्त, 15 साल बाद एक तस्वीर - दोस्ती की असली कहानी ये तस्वीर सिर्फ 10 लड़कों की नहीं, एक पूरी जिंदगी की है। ये तस्वीर सिर्फ 10 लड़कों की नहीं है। ये उस ग्रुप की तस्वीर है जिसका व्हाट्सएप ग्रुप कभी म्यूट नहीं हुआ। जिसमें कभी कोई प्लान पूरा नहीं होता, पर जब होता है तो जिंदगी याद रखती है। कहानी शुरू होती है इंदौर की एक गली से सब एक ही मोहल्ले में बड़े हुए। एक के घर टीवी देखना, दूसरे की साइकिल से स्कूल जाना, तीसरे के टिफिन पर लड़ना। फिर जिंदगी ने सबको खींच लिया। कोई इंजीनियर बन गया, कोई अपनी दुकान संभाल रहा है, कोई बाहर चला गया। किसी की दाढ़ी में सफेदी आ गई, किसी का पेट निकल आया। 15 साल तक सिर्फ फोन पर "कब मिलना है बे?" बोलते रहे। फिर एक दिन एक दोस्त ने बोला - "बहुत हुआ, इस बार नहीं आया तो ग्रुप से निकाल दूंगा।" और देखिए, 10 के 10 आ गए। कोई लाल शर्ट में, कोई कुर्ते में, कोई चश्मा लगा के। पर दिल वही 10वीं क्लास वाला। इस फोटो में जो बीच में बैठा है न भगवा गमछे वाला? उसने बोला - "यार पैसा सबने कमा लिया, पर सुकून तो इन्हीं...

किताब vs ChatGPT: बच्चों की पढ़ाई के लिए कौन बेहतर है? | Nitin Lakade

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किताब vs ChatGPT: बच्चों की पढ़ाई के लिए कौन बेहतर है? हर माँ-बाप ये सोच रहा है कि क्या ChatGPT से पढ़ाई करना सही है? जब बच्चे को कोई सवाल नहीं आता तो क्या उसे किताब पलटनी चाहिए या सीधा ChatGPT से पूछना चाहिए। इस ब्लॉग में आप जानेंगे:किताब पढ़ने के फायदे जो AI नहीं दे सकता ChatGPT से पढ़ाई के 3 बड़े फायदे बच्चों के लिए AI का नुकसान मेरा आज़माया हुआ तरीका - 10 मिनट किताब + 5 मिनट ChatGPT रूल अगर आप Indore, Hatod के पेरेंट हैं और अपने बच्चे की पढ़ाई को लेकर कन्फ्यूज हैं, तो ये ब्लॉग आपके लिए है।

सेठ ने किया कृष्ण को बंद! फिर आधी रात को हुआ चमत्कार | Nitin Lakade

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 ताले में बंद कृष्ण 😲🔒 एक गांव में एक सेठ रहता था। बड़ा ही कंजूस। उसके घर में एक छोटा सा मंदिर था, उसमें बाल-गोपाल की एक प्यारी सी मूर्ति थी। सेठ रोज सुबह अगरबत्ती घुमाकर चला जाता। पर सेठ को एक अजीब आदत थी। वह अपने सोने के सिक्के भी उसी मंदिर में, कृष्ण की मूर्ति के पीछे छुपाकर रखता था। वह सोचता था - "यहां किसकी नजर पड़ेगी, ये तो पत्थर है।" एक दिन गांव में खबर फैली कि डाकू आने वाले हैं। सेठ घबरा गया। उसने सारे सिक्के समेटे और सोचने लगा - कहाँ छुपाऊं? तभी उसकी नजर मंदिर के छोटे से दरवाजे पर पड़ी। उसमें कुंडी लगी थी। सेठ ने सारे सिक्के मंदिर के अंदर रख दिए, मूर्ति के ठीक सामने। और फिर बाहर से कुंडी लगाकर उस पर एक बड़ा ताला लगा दिया! उसकी पत्नी ने कहा - "अरे! ये क्या कर रहे हो? अंदर कान्हा है, उसे बंद कर दिया?" सेठ हंसा - "अरे पगली, ये पत्थर का है, इसे सांस थोड़ी आती है। ताले में रहेगा तो चोरों से बच जाएगा। मैं तो सिक्कों को बचा रहा हूं।" रात हो गई। डाकू नहीं आए। सेठ चैन से सो गया।पर आधी रात को उसे मंदिर से खट-खट की आवाज आने लगी। जैसे कोई अंदर से दरवाजा पीट...