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बधाई इंदौर! शुद्ध हवा-पानी, गौरैया, गिद्ध और कौवे गायब करने के बाद अब हमने बारिश भी गायब कर दी

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📢 बधाई इंदौर!  शुद्ध हवा-पानी, गौरैया, तीतर, गिद्ध और कौवे गायब करने के बाद अब हमने बारिश भी गायब कर दी...बधाई हो इंदौर।  हमने एक और उपलब्धि हासिल कर ली है। कभी जिस इंदौर की पहचान औसत से ज्यादा बारिश वाले शहर की थी, जहां बारिश के आंकड़े अक्सर सामान्य से ऊपर जाकर राहत देते थे, इस बार मानसून विदा हो गया और इंदौर को औसत से करीब 13 इंच कम बारिश देकर गया।यानी अब बात अधिक बारिश की नहीं है। हम औसत बारिश भी पूरी नहीं कर पा रहे।विकास जारी है, पर क्या कीमत पर?पहले हमने शुद्ध हवा कम की। फिर शुद्ध पानी कम होता गया। गौरैया कम होती गईं। तीतर दिखाई देना मुश्किल हुआ। गिद्ध लगभग गायब हो गए। कौवों की आवाज भी पहले जैसी नहीं रही। पेड़ कम हुए। खुली जमीन कम हुई। तालाब और प्राकृतिक जलस्रोत दबाव में आए और अब लगता है बारिश ने भी इंदौर से दूरी बनानी शुरू कर दी है।कभी बारिश का मतलब सिर्फ आसमान से गिरता पानी नहीं था। बारिश आती थी तो तालाब भरते थे। कुएं भरते थे। जमीन पानी सोखती थी।आज स्थिति कुछ अलग है बारिश ज्यादा हुई तो जलभराव। बारिश कम हुई तो जलसंकट। बारिश कुछ दिनों में ज्यादा गिर गई तो बाढ़ जैसी स्थित...

Lal Bahadur Shastri Jayanti : Jai Jawan Jai Kisan Ki Amar Kahani

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लाल बहादुर शास्त्री: कद छोटा, पर चरित्र सबसे ऊँचा इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान उनके कद से नहीं, बल्कि उनके चरित्र से होती है। लाल बहादुर शास्त्री जी ऐसे ही व्यक्तित्व थे। मात्र पाँच फीट दो इंच की साधारण काया, सादा पहनावा और शांत चेहरा—लेकिन भीतर ऐसा आत्मबल, जिसने कठिन समय में पूरे भारत का नेतृत्व किया। 2 अक्टूबर केवल महात्मा गांधी जी की जयंती नहीं है, यह उस महान राष्ट्रनायक की जन्मतिथि भी है, जिसने भारत को एक अमर मंत्र दिया— “जय जवान, जय किसान।” सादगी के पीछे की दृढ़ता कहाँ से आई? शास्त्री जी का बचपन अभावों में बीता। 1904 में मुगलसराय में जन्मे लाल बहादुर ने बहुत छोटी उम्र में अपने पिता को खो दिया। इसी दौर में महर्षि दयानन्द सरस्वती की पुस्तक ‘सत्यार्थ प्रकाश’ से उनका परिचय हुआ। आर्यसमाज के विचारों ने उनके जीवन में सत्य, स्वावलम्बन और समानता को दृढ़ किया। सिद्धांतों को जीवन में उतारना - दहेज और इस्तीफा जब उनका विवाह ललिता देवी जी से हुआ, तब उन्होंने दहेज लेने से इनकार कर दिया। केवल एक चरखा और कुछ सूत स्वीकार किया। 1956 में अरियालूर रेल दुर्घटना ...

महाकाल का चमत्कार उज्जैन में : दूध अभिषेक के समय हुई 3 सच्ची घटनाएँ | Nitin Lakade Ujjain

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  चित्र: महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग पर दूध अभिषेक - जैसा आपकी फोटो में है 🔱 महाकाल का चमत्कार उज्जैन में: जब अभिषेक करते ही बदल गई किस्मत ये कहानी नहीं, उज्जैन में घटी 3 सच्ची घटनाएं हैं जय श्री महाकाल! जैसा आप इस फोटो में देख रहे हैं, उज्जैन में जब कोई भक्त सच्चे मन से महाकाल का दूध से अभिषेक करता है, तो महाकाल उसकी पुकार जरूर सुनते हैं। कहते हैं यहाँ काल भी आकर रुक जाता है। आज आपको 3 ऐसी सच्ची घटनाएं बता रहा हूँ जो स्थानीय पुजारियों और भक्तों ने खुद देखी हैं। 1. इंदौर के बेटे की वाणी लौट आई - 2022 की घटना इंदौर 09 के एक परिवार का 4 साल का बेटा 8 महीने से बोल नहीं पा रहा था। सभी डॉक्टरों को दिखा लिया। आखिरी उम्मीद में परिवार उज्जैन आया। पिता ने लगातार 3 दिन तक सुबह इसी तरह दूध से अभिषेक किया। तीसरे दिन गर्भगृह के पुजारी ने खुद देखा कि शिवलिंग से बहता हुआ दूध हल्का सुनहरा हो गया और पूरे मंदिर में दिव्य सुगंध फैल गई। उसी रात बच्चे ने पहली बार 'माँ' कहा। आज भी वो परिवार हर महीने उज्जैन आता है। 2. 500 साल तक बिना मंदिर के भी चलता रहा अभिषेक इतिहास में दर्ज है, 1235 म...

राजवाड़ा का आखिरी केस - संजू और नितिन की इंदौर सराफा मिस्ट्री | Indore 09

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  राजवाड़ा का आखिरी केस SANJU X NITIN | INDORE SARFA UNDERCOVER MISSION Right: नितिन (मैं) Left: संजू लोकेशन: इंदौर राजवाड़ा, सराफा बाजार टाइम: रात 2:13 AM इंदौर का सराफा बंद हो चुका था। बारिश होकर रुकी थी। राजवाड़ा की लाइटें पीली पड़ रही थीं। मैं नितिन और मेरा जिगरी दोस्त संजू काले सूट में राजवाड़ा के सामने खड़े थे। लोगों को लगा हम किसी फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं, पर असली कहानी कुछ और थी। 1. शर्मा किराना का काला बैग शाम को शर्मा किराना वाले ने हमें बुलाया। बोला - "नितिन भाई, पिछले 3 दिन से हर रात 2 बजे एक काली Ambassador (MP - INDORE नंबर प्लेट) मेरी दुकान के सामने आकर रुकती है, 2 मिनट में चली जाती है।" संजू ने बोला - "आज रात पकड़ते हैं!" "संजू, याद रखना... कार आते ही कोई हरकत मत करना, सिर्फ नंबर नोट करना है" - मैंने धीरे से कहा। 2. रात 2:13 बजे - वो आई! ठीक 2:13 पर वही काली Ambassador धुंए के साथ आई। इस फोटो वाली जगह पर रुकी। अंदर से कोई बाहर नहीं आया। सिर...

रात 12 बजे उस बंगले में 10 दोस्तों के साथ क्या हुआ? - खौफनाक सच्ची कहानी | Nitin Friends

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  🏚️👁️ रात 12 बजे उस बंगले में क्या हुआ? नितिन और उसकी गैंग की सबसे डरावनी रात उस रात मौजूद थे: ⭐ नितिन (मैं) पप्पू राहुल संजू वरुण सुभाष रितेश धीरज ओम पप्पू काला सुभाष की बर्थडे पार्टी खत्म होने के बाद हम 10 दोस्त बाइक से घर जा रहे थे। रात के 11:45 बज रहे थे। विजय नगर के पीछे वाले सुनसान रास्ते पर वरुण की बाइक पंचर हो गई। सामने एक पुराना, बंद पड़ा बंगला था। राहुल बोला - "चलो थोड़ी देर वहीं रुकते हैं।" पप्पू काला ने मना किया - "भाई, इस बंगले के बारे में बहुत कहानियां सुनी हैं!" 1. बंगले के अंदर मैं (नितिन) टॉर्च लेकर आगे बढ़ा। पीछे संजू, ओम और धीरज थे। बंगले का गेट अपने आप चर्र... करके खुल गया। अंदर घुप्प अंधेरा। पप्पू ने मजाक में कहा - "भूत होगा तो पप्पू काला से डर के भाग जाएगा!" "श...! आवाज सुनो..." - सुभाष ने फुसफुसा कर कहा। ऊपर वाले कमरे से किसी के चलने की आवाज आ रही थी। 2. 12 बजते ही... जैसे ही मेरे मोबाइल में 12:00 बजा, बंगले की स...

दोस्तों ने मिलकर पार्टी में धूम मचा दी - नितिन और उसकी गैंग की मजेदार कहानी | Nitin

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  दोस्तों ने मिलकर पार्टी में धूम मचा दी! 🎉 इंदौर - नितिन और उसकी गैंग की कहानी आज के हीरो: ⭐ नितिन (मैं) पप्पू राहुल संजू वरुण सुभाष रितेश धीरज ओम पप्पू काला विजय नगर में सुभाष की बर्थडे पार्टी थी। DJ लगा था, लाइटें चमक रही थीं, पर डांस फ्लोर खाली पड़ा था। सब लोग बिरयानी की प्लेट पकड़ कर कोने में खड़े थे। मैंने देखा, मेरी पूरी गैंग - पप्पू, राहुल, संजू, वरुण, रितेश, धीरज, ओम और पप्पू काला सब बोर हो रहे हैं। मैंने आँख मारी और बोला - "चलो, धूम मचाते हैं!" 1. प्लान बना वरुण DJ के पास गया और बोला "भाई 'काला चश्मा' लगा।" राहुल ने लाइट वाले को इशारा किया। संजू ने सब आंटियों को बोला "आंटी थोड़ा साइड हो जाओ, शो शुरू होने वाला है!" मैं (नितिन) बीच में आया और चिल्लाया - "भाईयो, खाना बाद में, पहले पप्पू का डांस!" 2. धमाका शुरू सबसे पहले पप्पू ने अपना पेट हिलाकर डांस शुरू किया, सब हँस-हँस के लोटपोट! फिर पप्पू काला ने अपना काला चश्मा पहना और ब्रे...

PRIVACY या परिवार? मुश्किल वक्त में कौन काम आता है? Nitin Lakade Indore

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PRIVACY या परिवार? एक लड़का था… बहुत खुश रहता था कि उसकी जिंदगी में किसी की दखल नहीं है। उसका कमरा अलग, उसका मोबाइल अलग, उसकी परेशानियाँ अलग… और उसकी एक ही सोच थी— “मेरी जिंदगी है, मुझे पता है मुझे क्या करना है।” पर एक दिन जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जब उसे सच में किसी अपने की जरूरत पड़ी। दोस्त व्यस्त थे… सोशल मीडिया पर सैकड़ों लोग जुड़े थे, लेकिन मुश्किल समय में फोन करने वाला कोई नहीं था। तभी उसकी नजर माँ पर पड़ी। माँ ने कुछ पूछा नहीं… बस उसके पास बैठ गई। भाई ने बिना किसी सवाल के हाथ पकड़ लिया। Privacy जरूरी है, लेकिन रिश्तों से दूरी बनाना समझदारी नहीं है। हर बात सबको बताना जरूरी नहीं, लेकिन ऐसा भी मत कीजिए कि मुश्किल वक्त में आपके पास अपना कहने वाला कोई न बचे। क्योंकि जिंदगी के अच्छे दिनों में बहुत लोग आपके साथ दिखाई देते हैं… लेकिन असली अपने वही हैं, जो आपके बुरे वक्त में बिना बुलाए आपके पास खड़े हो जाते हैं। सोचिए… आपकी Privacy के पीछे आपका अपना परिवार है, या आपकी Privacy ने आपको परिवार से ह...

10 दोस्त, 15 साल बाद एक तस्वीर - दोस्ती की असली कहानी | Nitin Lakade Indore

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  10 दोस्त, 15 साल बाद एक तस्वीर - दोस्ती की असली कहानी ये तस्वीर सिर्फ 10 लड़कों की नहीं, एक पूरी जिंदगी की है। ये तस्वीर सिर्फ 10 लड़कों की नहीं है। ये उस ग्रुप की तस्वीर है जिसका व्हाट्सएप ग्रुप कभी म्यूट नहीं हुआ। जिसमें कभी कोई प्लान पूरा नहीं होता, पर जब होता है तो जिंदगी याद रखती है। कहानी शुरू होती है इंदौर की एक गली से सब एक ही मोहल्ले में बड़े हुए। एक के घर टीवी देखना, दूसरे की साइकिल से स्कूल जाना, तीसरे के टिफिन पर लड़ना। फिर जिंदगी ने सबको खींच लिया। कोई इंजीनियर बन गया, कोई अपनी दुकान संभाल रहा है, कोई बाहर चला गया। किसी की दाढ़ी में सफेदी आ गई, किसी का पेट निकल आया। 15 साल तक सिर्फ फोन पर "कब मिलना है बे?" बोलते रहे। फिर एक दिन एक दोस्त ने बोला - "बहुत हुआ, इस बार नहीं आया तो ग्रुप से निकाल दूंगा।" और देखिए, 10 के 10 आ गए। कोई लाल शर्ट में, कोई कुर्ते में, कोई चश्मा लगा के। पर दिल वही 10वीं क्लास वाला। इस फोटो में जो बीच में बैठा है न भगवा गमछे वाला? उसने बोला - "यार पैसा सबने कमा लिया, पर सुकून तो इन्हीं...

किताब vs ChatGPT: बच्चों की पढ़ाई के लिए कौन बेहतर है? | Nitin Lakade

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किताब vs ChatGPT: बच्चों की पढ़ाई के लिए कौन बेहतर है? हर माँ-बाप ये सोच रहा है कि क्या ChatGPT से पढ़ाई करना सही है? जब बच्चे को कोई सवाल नहीं आता तो क्या उसे किताब पलटनी चाहिए या सीधा ChatGPT से पूछना चाहिए। इस ब्लॉग में आप जानेंगे:किताब पढ़ने के फायदे जो AI नहीं दे सकता ChatGPT से पढ़ाई के 3 बड़े फायदे बच्चों के लिए AI का नुकसान मेरा आज़माया हुआ तरीका - 10 मिनट किताब + 5 मिनट ChatGPT रूल अगर आप Indore, Hatod के पेरेंट हैं और अपने बच्चे की पढ़ाई को लेकर कन्फ्यूज हैं, तो ये ब्लॉग आपके लिए है।

सेठ ने किया कृष्ण को बंद! फिर आधी रात को हुआ चमत्कार | Nitin Lakade

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 ताले में बंद कृष्ण 😲🔒 एक गांव में एक सेठ रहता था। बड़ा ही कंजूस। उसके घर में एक छोटा सा मंदिर था, उसमें बाल-गोपाल की एक प्यारी सी मूर्ति थी। सेठ रोज सुबह अगरबत्ती घुमाकर चला जाता। पर सेठ को एक अजीब आदत थी। वह अपने सोने के सिक्के भी उसी मंदिर में, कृष्ण की मूर्ति के पीछे छुपाकर रखता था। वह सोचता था - "यहां किसकी नजर पड़ेगी, ये तो पत्थर है।" एक दिन गांव में खबर फैली कि डाकू आने वाले हैं। सेठ घबरा गया। उसने सारे सिक्के समेटे और सोचने लगा - कहाँ छुपाऊं? तभी उसकी नजर मंदिर के छोटे से दरवाजे पर पड़ी। उसमें कुंडी लगी थी। सेठ ने सारे सिक्के मंदिर के अंदर रख दिए, मूर्ति के ठीक सामने। और फिर बाहर से कुंडी लगाकर उस पर एक बड़ा ताला लगा दिया! उसकी पत्नी ने कहा - "अरे! ये क्या कर रहे हो? अंदर कान्हा है, उसे बंद कर दिया?" सेठ हंसा - "अरे पगली, ये पत्थर का है, इसे सांस थोड़ी आती है। ताले में रहेगा तो चोरों से बच जाएगा। मैं तो सिक्कों को बचा रहा हूं।" रात हो गई। डाकू नहीं आए। सेठ चैन से सो गया।पर आधी रात को उसे मंदिर से खट-खट की आवाज आने लगी। जैसे कोई अंदर से दरवाजा पीट...

कड़वा है पर सच है - Nitin Lakade | Kadwa Hai Par Sach Hai

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जिंदगी में एक बात हमेशा याद रखना, सच हमेशा कड़वा ही होता है।दोस्तों, आजकल लोग मीठा झूठ सुनना ज्यादा पसंद करते हैं। अगर आप किसी को उसकी गलती पर सच बोलोगे तो वो आपसे नफरत करने लगेगा। यही आज की सबसे बड़ी सच्चाई है। कड़वा है पर सच है - इसका मतलब क्या है? इसका मतलब ये है कि सच सुनने की हिम्मत हर किसी में नहीं होती। लोग तारीफ सुनना चाहते हैं, पर सुधार की बात कोई नहीं सुनना चाहता। अगर आप जिंदगी में आगे बढ़ना चाहते हो तो कड़वी बातों को भी सुनना सीखो, क्योंकि वही आपको आगे ले जाएंगी। आपको क्या लगता है? क्या सच में सच हमेशा कड़वा होता है?  Comment में जरूर बताना।

सबको खुश रखने की कोशिश मत करो | Mahadev Motivation | Nitin Lakade Indore -

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🚩  || जय श्री महाकाल ||   🚩 कोशिश - Nitin Lakade, Indore जीवन में हम सबको खुश रखने की कोशिश करते हैं, लेकिन ये संभव नहीं है। भगवान शिव कहते हैं - अपना कर्म करो, सही रास्ते पर चलो। कोशिश - छोटा शब्द है पर इसमें जीवन छुपा है। सबको खुश रखने की कोशिश मत करो, ऐसा करके तुम सिर्फ अपना वक्त बर्बाद करोगे और दूसरों की उम्मीदें बढ़ाओगे। महादेव कहते हैं - कर्म करो, फल की चिंता मत करो। जीवन में 3 बातें याद रखो: कोशिश: कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। सच: हमेशा सच के रास्ते पर चलो। महादेव: जो किस्मत में है, वो महादेव देगा। कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। महादेव भी यही सिखाते हैं। अगर आप सबको खुश करने में लगे रहोगे, तो खुद दुखी हो जाओगे। इसलिए जो सही है, वही करो।  हर हर महादेव! अगर ये बात दिल को छू गई तो Comment में Har Har Mahadev जरूर लिखें।

मिट्टी से पहचान तक - मैं नितिन लकड़े, प्रजापत नगर इंदौर से

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नमस्कार, मैं नितिन लकड़े। प्रजापत नगर इंदौर का रहने वाला हूँ। आप सोच रहे होंगे मैं ब्लॉग क्यों लिख रहा हूँ? हम प्रजापत नगर में रहते हैं, स्वच्छ भारत को आकार देना हमारा काम है। मेरे दादा कहते थे - बेटा, मिट्टी कभी खराब नहीं होती, बस उसे सही हाथ चाहिए। यही बात मैं सिरपुर तालाब पर देखता हूँ। लोग उसे गंदा कहते हैं, पर मैं उसमें आने वाले कल का सुंदर इंदौर देखता हूँ। इसीलिए मैंने ये ब्लॉग शुरू किया है।  यहाँ मैं लिखूंगा: प्रजापत नगर की हर छोटी-बड़ी खबर सिरपुर तालाब को बचाने की हमारी कोशिश और रोज एक अच्छी बात जो आपके दिन को अच्छा बना देये सिर्फ मेरा ब्लॉग नहीं है, ये हम सब प्रजापत नगर वालों का ब्लॉग है। अगर आप प्रजापत नगर या सिरपुर तालाब के पास रहते हैं, तो कमेंट में जरूर बताइए। आपका अपना नितिन लकड़े - Nitin Lakade प्रजापत नगर, इंदौर

समग्र आईडी में नाम की गलती कैसे सुधारें

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  नमस्कार, मैं नितिन लकड़े, प्रजापत नगर, इंदौर से। पिछले लेख में मैंने बताया था कि नाम गलत होने से जाति प्रमाण पत्र में परेशानी आती है। आज मैं बताऊँगा कि समग्र आईडी में सुधार कैसे होता है। समग्र आईडी में सुधार क्यों जरूरी है ? मध्यप्रदेश में लाड़ली बहना, छात्रवृत्ति और जाति प्रमाण पत्र - सबका आधार समग्र आईडी है। अगर समग्र में नाम गलत है तो कोई भी योजना का लाभ नहीं मिलता। सुधार के लिए क्या करें ? १. समग्र पोर्टल पर जाएं samagra.gov.in पर जाकर समग्र आईडी खोजें। २. आधार से जोड़ें समग्र को आधार से जोड़ने का अनुरोध करें। नाम आधार के अनुसार ही सही होगा। ३. नगर निगम में आवेदन दें अगर ऑनलाइन न हो तो जोनल कार्यालय इंदौर में जाकर सुधार फॉर्म भरें। साथ में आधार कार्ड और अंकसूची लगाएं। ४. समय आमतौर पर सात दिन में समग्र आईडी सुधर जाती है। मेरा सुझाव है कि पहले समग्र, फिर आधार, फिर जाति प्रमाण पत्र - इसी क्रम में सुधार करवाएं। यह जानकारी उपयोगी लगी हो तो इसे साझा करें। नितिन लकड़े - Nitin Lakade प्रजापत नगर, इंदौर

नितिन लकड़े प्रजापत नगर इंदौर - जाति प्रमाण पत्र सुधार की जानकारी

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नितिन लकड़े - प्रजापत नगर, इंदौर से नमस्कार, मेरा नाम नितिन लकड़े है और मैं इंदौर के प्रजापत नगर का रहने वाला हूँ। यह ब्लॉग मैंने अपने अनुभव साझा करने के लिए बनाया है।  नाम की गलती से होने वाली परेशानी सरकारी कागजों में नाम की छोटी सी गलती बहुत बड़ी परेशानी बन जाती है। मेरे नाम में लकड़े शब्द को कई जगह लकाड़े लिख दिया गया था। इसी कारण मेरे बच्चों गीतिका और कर्मण्य के जाति प्रमाण पत्र बनने में देरी हुई। मध्यप्रदेश में जाति प्रमाण पत्र कैसे सुधरवाएं ? अगर आपके प्रमाण पत्र में भी नाम गलत है तो आप यह काम कर सकते हैं। पहला चरण - शपथ पत्र बनवाएं आपको तहसील के पास से एक शपथ पत्र बनवाना होगा कि आपका सही नाम नितिन लकड़े है। दूसरा चरण - आवेदन करें एमपी ऑनलाइन या लोक सेवा केंद्र पर जाकर आरएस / ४३९ के तहत सुधार के लिए आवेदन दें। तीसरा चरण - दस्तावेज लगाएं आवेदन के साथ आधार कार्ड, समग्र आईडी और स्कूल की अंकसूची लगाएं। चौथा चरण - जाँच पटवारी द्वारा जाँच के बाद तहसीलदार द्वारा नया प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। समग्र आईडी सुधारना क्यों जरूरी है ? मध्यप्रदेश में सभी योजनाओं का आधार समग्र आईडी ह...

सब कुछ होते हुए भी हम दुखी क्यों हैं? | प्रेरणादायक हिंदी कहानी | जो है उसकी कीमत समझो | Nitin Lakade

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शीर्षक: गरीब माली और राजा का सबसे बड़ा सबक एक बहुत बड़े राज्य का राजा था। उसके पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी। विशाल महल, हजारों सैनिक, सोने-चाँदी के खजाने और अनगिनत सेवक—सब कुछ था। लेकिन राजा की एक आदत बहुत खराब थी। उसे लगता था कि दुनिया में पैसे से सब कुछ खरीदा जा सकता है। राजा अक्सर अपने मंत्रियों से कहता— “जिसके पास धन है, उसके पास सम्मान है। जिसके पास धन नहीं, उसका कोई मूल्य नहीं।” मंत्री राजा की हर बात में हाँ मिलाते थे। क्योंकि कोई भी राजा को नाराज़ नहीं करना चाहता था। महल के पीछे एक बहुत सुंदर बगीचा था। उस बगीचे की देखभाल एक बूढ़ा माली करता था, जिसका नाम हरिदास था। हरिदास गरीब था। उसके कपड़े साधारण थे और उसका छोटा-सा घर था। लेकिन वह हमेशा खुश रहता था। वह सुबह सूरज निकलने से पहले बगीचे में पहुँच जाता। फूलों को पानी देता, सूखे पौधों को हटाता और नए पौधे लगाता। वह पौधों से ऐसे बातें करता था, जैसे वे उसके अपने बच्चे हों। एक दिन राजा बगीचे में घूम रहा था। उसने देखा कि हरिदास एक छोटे-से पौधे के पास बैठा मुस्कुरा रहा है। राजा ने पूछा— “हरिदास, तुम्हारे पास न धन है, न बड़ा घर, न कीमती ...

समय रहते अपनों की कीमत समझिए | एक भावुक और प्रेरणादायक हिंदी कहानी | Nitin Lakade

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  समय रहते जाग जाओ, वरना पछताने के लिए भी समय नहीं बचेगा! कहानी: बूढ़े पिता की आखिरी इच्छा रवि एक बड़े शहर में नौकरी करता था। अच्छी तनख्वाह, बड़ा घर, कार और आधुनिक सुविधाएँ—उसके पास सब कुछ था। लेकिन एक चीज़ थी, जिसके लिए उसके पास हमेशा कमी रहती थी— समय । उसके गाँव में उसके बूढ़े पिता अकेले रहते थे। माँ को गुज़रे हुए पाँच साल हो चुके थे। पिता अक्सर रवि को फोन करते और कहते— “बेटा, जब समय मिले तो गाँव आ जाना। तुझसे बहुत दिनों से मिला नहीं हूँ।” रवि हर बार एक ही जवाब देता— “पिताजी, अभी बहुत काम है। अगले महीने पक्का आऊँगा।” लेकिन वह अगला महीना कभी नहीं आया। दिन बीतते गए। एक दिन रवि के फोन पर गाँव के पड़ोसी का फोन आया। रवि ने फोन उठाया। उधर से आवाज आई— “बेटा… जल्दी गाँव आ जाओ। तुम्हारे पिताजी की तबीयत बहुत खराब है।” रवि घबरा गया। उसने तुरंत कहा— “मैं आज ही निकलता हूँ।” लेकिन उसी समय उसके ऑफिस में एक बहुत जरूरी मीटिंग थी। उसने सोचा— “पहले यह काम पूरा कर लेता हूँ। शाम तक निकल जाऊँगा।” शाम हुई, फिर एक और काम आ गया। उसने गाँव जाने का कार्यक्रम अगले दिन पर टाल दिया। अगली सुबह फिर फोन आया। इस ...

₹10 वाली कलम ने कैसे दिलाया ₹10 लाख का पैकेज : एक सच्ची प्रेरणादायक कहानी

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"₹10 वाला कलम और ₹10 लाख का सौदा" पुणे में अंकित नाम का लड़का था। 12वीं फेल। घर की हालत खराब। एक दिन उसने स्टेशन पर ₹10 वाली कलम बेचना शुरू किया। लोग हंसते थे "ये क्या करेगा?"  अंकित हर ग्राहक से 2 मिनट बात करता। नाम पूछता, हालचाल लेता। और कलम के साथ एक छोटी चिट दे देता - "आपका दिन अच्छा जाए"।3 महीने में लोग उसी से कलम लेने आने लगे। "अंकित भैया की कलम में दुआ होती है"।1 साल बाद एक कंपनी के CEO उसी स्टेशन से गुजरे। अंकित ने उन्हें भी कलम + चिट दी। CEO को बात पसंद आई। उन्होंने अंकित को अपनी कंपनी में "Customer Experience Head" की नौकरी ऑफर की। सैलरी ₹10 लाख सालाना।आज अंकित 200 लोगों की टीम चलाता है। ग्यान: प्रोडक्ट नहीं, रिश्ता बेचो। लोग चीज नहीं, इज्जत खरीदते हैं।छोटी शुरुआत, बड़ी सोच। ₹10 से भी इम्पायर शुरू हो सकती है।हर इंसान से अच्छा व्यवहार करो। पता नहीं कौन आपका दरवाजा खोले। Q1: ये कहानी असली है या काल्पनिक? A: ये कहानी प्रेरणा के लिए लिखी गई है। इसका मकसद आपको मोटिवेट करना है। Q2: ₹10 से बिजनेस कैसे शुरू करें? A: किसी भी छोटे प्रोड...

दादी की एक थाली: भारतीय संस्कृति का असली मतलब | Hearttouching Story

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छोटा था तब मुझे लगता था कि खाना सिर्फ भूख मिटाने के लिए होता है। रोटी, सब्जी, दाल... खाओ और खेलने भाग जाओ। लेकिन दादी की एक थाली ने मेरी सोच ही बदल दी।दादी गांव से थीं। उनके पास न फ्रिज था, न माइक्रोवेव। लेकिन उनके पास समय था। और उस समय से वो संस्कार परोसती थीं।वो थाली कोई आम थाली नहीं थी। स्टील की गोल थाली। बीच में चावल का पहाड़, चारों तरफ कटोरियाँ। एक में दाल, एक में सब्जी, एक में अचार, एक में दही। और सबसे ऊपर केले का पत्ता।मैं पूछता: "दादी, इतनी सारी कटोरी क्यों?" दादी हंसकर बोलतीं: "बेटा, ये षड्रस है। भारतीय संस्कृति कहती है कि भोजन में 6 रस होने चाहिए - मीठा, खट्टा, नमकीन, कड़वा, तीखा, कषाय। तभी शरीर और मन दोनों तृप्त होते हैं।"पहला सबक: संतुलन दादी कभी एक ही सब्जी नहीं बनाती थीं। कहतीं "जैसे जीवन में सुख-दुख दोनों चाहिए, वैसे थाली में भी सब रस चाहिए। सिर्फ मीठा खाओगे तो बीमार पड़ जाओगे।" उस दिन समझ आया कि संस्कृति का मतलब Balance है।दूसरा सबक: सम्मान खाने से पहले दादी थाली के चारों तरफ पानी का गोल घेरा बनातीं। फिर अन्न देवता को प्रणाम। कहतीं "अन...

बुद्धिमान लकड़हारा और लालची सेठ की कहानी | Moral Story | Rochak Naitik Kahani

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बुद्धिमान लकड़हारा और लालची सेठ की कहानी बुद्धिमान लकड़हारा और लालची सेठ की कहानीबहुत समय पहले की बात है। एक घने जंगल के किनारे रामू नाम का एक लकड़हारा रहता था। रामू बहुत गरीब था, लेकिन दिल का बहुत साफ और ईमानदार था। वह रोज जंगल से लकड़ी काटकर लाता और बाजार में बेचकर अपना गुजारा करता था।      लालची सेठ की चालउसी गांव में एक बहुत लालची सेठ रहता था जिसका नाम था धनपत। सेठ को हमेशा दूसरों की चीज हड़पने की आदत थी।एक दिन सेठ ने देखा कि रामू एक बहुत मोटा और कीमती सागौन का पेड़ काट रहा है। सेठ के मन में लालच आ गया।  वह तुरंत रामू के पास गया और बोला:  "अरे रामू! ये पेड़ मेरा है। मैं तुम्हें 10 रुपये दूंगा। लकड़ी मुझे दे दो।"रामू ने कहा: "सेठ जी, ये पेड़ सरकारी जंगल का है। ये किसी का नहीं है। मैं इसे काटकर मंडी में 50 रुपये में बेचूंगा।"सेठ गुस्से में बोला: "अगर नहीं दी तो देख लेना। मैं राजा से शिकायत कर दूंगा।"      लकड़हारे की बुद्धिमानीरामू डर गया। रात भर उसे नींद नहीं आई। अगले दिन सुबह उसने एक तरकीब सोची।वह उस पेड़ की लकड़ी के 4 बराबर टुकड़े करके बाजार ...

स्वार्थी राजा और बुद्धिमान मंत्री की कहानी : सच्ची ताकत क्या है?

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स्वार्थी राजा और बुद्धिमान मंत्री की कहानी      एक समय की बात है कि एक बहुत बड़ा और समृद्ध राज्य था। वहाँ का राजा अपनी प्रजा से ज्यादा अपने वैभव और अपनी जीत से प्रेम करता था। उसे हर हाल में पड़ोसी राज्यों को जीतना पसन्द था। एक बार उसने एक बहुत बड़े युद्ध की घोषणा की।       युद्ध पर जाने से पहले उसने अपने राज्य के सबसे बुद्धिमान और बुजुर्ग मन्त्री को बुलाया और गर्व से कहा कि मन्त्री जी! इस युद्ध को जीतने के लिए मैंने देश के कोने-कोने से नौजवानों को इकट्ठा किया है। लाखों लोग मेरे एक इशारे पर अपनी जान देने के लिए तैयार खड़े हैं। मेरी सत्ता की ताकत देखो कि लोग मेरे लिए मरने को उत्सुक हैं। बुजुर्ग मन्त्री ने राजा की ओर देखा। उसकी आँखों में गहरी उदासी थी।       बुजुर्ग मन्त्री शान्त स्वर में कहा कि राजन! आप जिसे अपनी ताकत समझ रहे हैं, वह वास्तव में आपकी सबसे बड़ी कमजोरी और आपका पाप है। एक सच्चा राजा वह होता है, जो अपनी प्रजा के जीवन की रक्षा के लिए अपने जीवन को दांव पर लगा देता है। लेकिन आप एक ऐसे स्वार्थी राजा हैं, जो अपनी झूठी शान और मुकुट क...

नियमित जीवन पद्धति - Regulated lifestyle

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नियमित जीवन पद्धति - Regulated lifestyle सूर्य नियमित रूप से ठीक समय पर उदित होता है और निश्‍चित समय पर ही अस्त होता है, हम भी अपने जीवन में प्रत्येक कार्य निश्‍चित समय पर करने का अभ्यास करें, अर्थात अपनी जीवन पद्धति नियमित बनायें। सूर्य से हम परोपकार और समानता का व्यवहार सीखें। हमारे भू-मण्डल का सारा कार्य व्यवहार उसी के ऊपर आधारित है। संसार के सभी जीव-जन्तुओं और वनस्पति आदि को उसी से जीवन मिलता है। सूर्य की भांति हमारा जीवन भी संसार के सभी जीव-जन्तुओं का जीवन दाता अर्थात सहारा देने वाला हो। हमारी प्रेरणा से उनके जीवन में नव-जीवन का संचार हो। सूर्य की (जिस प्रकार अपने घरों, सड़कों और मार्गों को हम बार-बार साफ करते हैं फिर भी कई बार उनमें कूड़ा-कर्कट, ईंट-पत्थर या रेत मिट्टी रह जाती है। इसी प्रकार धर्म-मार्ग में भी काम करते समय ईर्ष्या-द्वेष छल-कपट, स्वार्थ और भ्रष्टाचार रूपी कंकर-पत्थर रुकावट डाला करते हैं।) किरणें संसार को रोग के कीटाणुओं से रहित कर देती हैं, ऐसे ही हम वैदिक ज्ञान के प्रकाश द्वारा संसार के अज्ञान रूपी अंधकार को नष्ट करते चले जायें जिससे वैदिक ज्ञान का उदय होता चला जाये...