Monday, 20 July 2026

नियमित जीवन पद्धति - Regulated lifestyle

नियमित जीवन पद्धति - Regulated lifestyle

सूर्य नियमित रूप से ठीक समय पर उदित होता है और निश्‍चित समय पर ही अस्त होता है, हम भी अपने जीवन में प्रत्येक कार्य निश्‍चित समय पर करने का अभ्यास करें, अर्थात अपनी जीवन पद्धति नियमित बनायें।

सूर्य से हम परोपकार और समानता का व्यवहार सीखें। हमारे भू-मण्डल का सारा कार्य व्यवहार उसी के ऊपर आधारित है। संसार के सभी जीव-जन्तुओं और वनस्पति आदि को उसी से जीवन मिलता है। सूर्य की भांति हमारा जीवन भी संसार के सभी जीव-जन्तुओं का जीवन दाता अर्थात सहारा देने वाला हो। हमारी प्रेरणा से उनके जीवन में नव-जीवन का संचार हो। सूर्य की (जिस प्रकार अपने घरों, सड़कों और मार्गों को हम बार-बार साफ करते हैं फिर भी कई बार उनमें कूड़ा-कर्कट, ईंट-पत्थर या रेत मिट्टी रह जाती है। इसी प्रकार धर्म-मार्ग में भी काम करते समय ईर्ष्या-द्वेष छल-कपट, स्वार्थ और भ्रष्टाचार रूपी कंकर-पत्थर रुकावट डाला करते हैं।) किरणें संसार को रोग के कीटाणुओं से रहित कर देती हैं, ऐसे ही हम वैदिक ज्ञान के प्रकाश द्वारा संसार के अज्ञान रूपी अंधकार को नष्ट करते चले जायें जिससे वैदिक ज्ञान का उदय होता चला जाये।

बच्चे पूरे विश्‍व का भविष्य - Children are the future of the entire world

बच्चे पूरे विश्‍व का भविष्य - Children are the future of the entire world 

स्वस्थ सामाजिक वातावरण एक बालक के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। परन्तु आजकल का आधुनिक समाज उसी बालक को बाल्य-श्रमिक बनाकर स्वयं को गर्वित महसूस कर रहा है। बाल्य-श्रम पूरे विश्‍व की समस्या हे। बाल्य-श्रम का उद्योगिक-क्रान्ति में भी महत्वपूर्ण स्थान रहा है। बच्चों को बाल्य-श्रमिक बनाने के दो मुख्य कारण हैः- 1. गरीबी और 2. शिक्षा का अभाव। इन दोनों कारणों की वजह से, मजबूरी में, आज लाखों-करोड़ो की संख्या में इन मासूम एवम् सरल बच्चों से हानिकारक रासायनिक पदार्थों के मध्य काल-कारखानों में, घरों में, चाय दुकानों में, ढाबा में, तरह-तरह के अत्याचारों को सहन करते हुए काम करवाया जा रहा है। बच्चे पूरे विश्‍व का भविष्य हैं। उन्हें कितनी जिम्मेदारियां सम्हालनी हैं- परिवार की, समाज की, राष्ट्र की एवं विश्‍व की भी। अगर बचपन में ही बाल्य-श्रमिक बन जायेंगे तो कैसे अच्छे तथा प्रतिष्ठावान नागरिक बन पायेंगे। भारत में के स्वयं  सेवी इस समस्या का समाधान निकालने की चेष्टा तो कर रहे हैं। परन्तु सरकार का भी उत्तरदायित्व है कि गरीबी के कारण बच्चों की शिक्षा में अभाव न आवे।