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Friday, 26 December 2025

सकारात्मक सोच का मंत्र - Positive Thinking Mantra

सकारात्मक सोच का मंत्र
Positive Thinking Mantra

महत्वकांक्षा व्यक्ति के जीवन में प्राण और शक्ति का संचार करती है, उसे क्रियाशील बनाती है तथा संघर्ष के लिए प्रेरणा देती है। ईश्‍वर उन्हीं का साथ देते हैं, जो मजबूत संकल्प से धनी होते हैं। चट्टान मजबूत होती है, पर इसे लोहा तोड़ देता है। सकारात्मक सोच एक ऐसा मंत्र है जिससे चुटकियों में ही व्यक्ति तनावमुक्त हो सकता है। ध्यान रखिए, आप नकारात्मक सोच से दूर हटकर सकारात्मक विषयों पर ध्यान केन्द्रित करके ही भय, आशंका, चिंता से मुक्ति पा सकते हैं। ईश्‍वर में आस्था रखों यह शब्द आपके जीवन को रोशन कर सकते हैं। इसमें एक ऐसी विद्यमान है, जिसे आप सहज ही अनुभव कर सकेंगे। भूखण्ड के दोष के कारण नाना प्रकार के प्रभाव आते हैं। भूखण्ड के दोष मन्दिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, कोठी, मकान, फ्लैट, कल-कारखाने सबको प्रभावित करते हैं। आइए हमारा साथ लीजिए, आपके विजय रथ को आगे बढाने में हम आपके सहयोगी बने। आशा सकारात्मक विचार की सूचक है। आशावान व्यक्ति का मन सफलता, सम्पन्नता और सुखमय जीवन का संदेश ग्रहण करता है। इसी से वह अपने लक्ष्य को पाने में सफलता प्राप्त करता है। बीते कल की चर्चा मत कीजिए और आने वाले कल की चिंता। सुखी जीवन का राज है। आज की सोचिए, आज को संवारिए, आज को संवारिए, आज को सार्थक कीजिए। कल किसी ने नहीं देखा। प्रत्येक क्षण को खूबसूरत बनाइए।

- Nitin Lakade
- Prajapat Nagar, Indore (M.P.)

Friday, 8 August 2025

एक सज्जन की छोटी कहानी: एक रोटी की कीमत | Naitik Kahani

Nitin Lakade
Prajapat Nagar, Indore (M.P.) 


एक सज्जन की छोटी कहानी: एक रोटी की कीमत

गांव के किनारे पंडित रामप्रसाद जी रहते थे। उम्र 60 साल, लेकिन दिल 20 साल के जवान जैसा। पूरा गांव उन्हें "सज्जन" कहता था। उनके पास ज्यादा पैसा नहीं था, पर इज्जत बहुत थी।

सर्दी की रात और भूखा आदमी

दिसंबर की कड़ाके की सर्दी थी। रात के 9 बजे पंडित जी खाना खाकर सोने वाले थे। तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।

दरवाजा खोला तो सामने 25 साल का एक नौजवान खड़ा था। कपड़े फटे हुए, पैर नंगे, और ठंड से कांप रहा था।

वो बोला:

"बाबा... 2 दिन से कुछ नहीं खाया। क्या थोड़ा पानी मिल जाएगा?"

सज्जनता का फैसला

पंडित जी के पास उस समय अपनी और पत्नी के लिए सिर्फ 2 रोटी और थोड़ी सब्जी बची थी। पत्नी ने धीरे से कहा: "जी, कल सुबह का इंतजाम क्या होगा?"

पंडित जी मुस्कुराए और बोले:

"जिसका पेट आज खाली है, उसका कल कौन सोचेगा? भगवान किसी का पेट खाली नहीं रखता।"

उन्होंने थाली में से अपनी एक रोटी, पत्नी की एक रोटी और सारी सब्जी उस नौजवान को दे दी। साथ में एक पुरानी चादर भी ओढ़ा दी।

नौजवान की आंखें भर आईं। उसने कहा: "बाबा, मैं ये एहसान कभी नहीं भूलूंगा।"

6 महीने बाद...

6 महीने बाद गांव में मेला लगा। एक बड़ी गाड़ी आकर पंडित जी के घर के सामने रुकी। उसी नौजवान उतरा। अब उसने बढ़िया कपड़े पहने थे।

वो पंडित जी के पैरों में गिर पड़ा और बोला:

"बाबा पहचानो? मैं वही हूं जिसे आपने उस रात रोटी दी थी। उस दिन के बाद मैंने मेहनत की। आज मैं शहर में 10 लोगों को रोजगार देता हूं।"

उसने पंडित जी को 1 लाख रुपये और एक सम्मान पत्र दिया। बोला: "आपने मुझे एक रोटी दी थी। आज मैं आपको 1000 रोटी खिलाने लायक बना हूं।"

पूरा गांव ये देखकर कह उठा - "सच में, यही सज्जनता है।"

इस कहानी से 2 बड़ी सीखें

  1. इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है: आपके पास कम हो तब भी किसी की मदद करने से आप छोटे नहीं होते।
  2. अच्छाई का फल जरूर मिलता है: एक रोटी दी, तो भगवान ने 1000 रोटी का रास्ता खोल दिया।

Quiz: आपकी राय

अगर आपकी जगह पंडित जी होते तो क्या करते?
A. एक रोटी दे देते
B. मना कर देते क्योंकि कल का पता नहीं

Comment में A या B लिखिए 👇


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