नियमित जीवन पद्धति - Regulated lifestyle

नियमित जीवन पद्धति - Regulated lifestyle

सूर्य नियमित रूप से ठीक समय पर उदित होता है और निश्‍चित समय पर ही अस्त होता है, हम भी अपने जीवन में प्रत्येक कार्य निश्‍चित समय पर करने का अभ्यास करें, अर्थात अपनी जीवन पद्धति नियमित बनायें।

सूर्य से हम परोपकार और समानता का व्यवहार सीखें। हमारे भू-मण्डल का सारा कार्य व्यवहार उसी के ऊपर आधारित है। संसार के सभी जीव-जन्तुओं और वनस्पति आदि को उसी से जीवन मिलता है। सूर्य की भांति हमारा जीवन भी संसार के सभी जीव-जन्तुओं का जीवन दाता अर्थात सहारा देने वाला हो। हमारी प्रेरणा से उनके जीवन में नव-जीवन का संचार हो। सूर्य की (जिस प्रकार अपने घरों, सड़कों और मार्गों को हम बार-बार साफ करते हैं फिर भी कई बार उनमें कूड़ा-कर्कट, ईंट-पत्थर या रेत मिट्टी रह जाती है। इसी प्रकार धर्म-मार्ग में भी काम करते समय ईर्ष्या-द्वेष छल-कपट, स्वार्थ और भ्रष्टाचार रूपी कंकर-पत्थर रुकावट डाला करते हैं।) किरणें संसार को रोग के कीटाणुओं से रहित कर देती हैं, ऐसे ही हम वैदिक ज्ञान के प्रकाश द्वारा संसार के अज्ञान रूपी अंधकार को नष्ट करते चले जायें जिससे वैदिक ज्ञान का उदय होता चला जाये।

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