समय रहते अपनों की कीमत समझिए | एक भावुक और प्रेरणादायक हिंदी कहानी | Nitin Lakade
समय रहते जाग जाओ, वरना पछताने के लिए भी समय नहीं बचेगा! कहानी: बूढ़े पिता की आखिरी इच्छा रवि एक बड़े शहर में नौकरी करता था। अच्छी तनख्वाह, बड़ा घर, कार और आधुनिक सुविधाएँ—उसके पास सब कुछ था। लेकिन एक चीज़ थी, जिसके लिए उसके पास हमेशा कमी रहती थी— समय । उसके गाँव में उसके बूढ़े पिता अकेले रहते थे। माँ को गुज़रे हुए पाँच साल हो चुके थे। पिता अक्सर रवि को फोन करते और कहते— “बेटा, जब समय मिले तो गाँव आ जाना। तुझसे बहुत दिनों से मिला नहीं हूँ।” रवि हर बार एक ही जवाब देता— “पिताजी, अभी बहुत काम है। अगले महीने पक्का आऊँगा।” लेकिन वह अगला महीना कभी नहीं आया। दिन बीतते गए। एक दिन रवि के फोन पर गाँव के पड़ोसी का फोन आया। रवि ने फोन उठाया। उधर से आवाज आई— “बेटा… जल्दी गाँव आ जाओ। तुम्हारे पिताजी की तबीयत बहुत खराब है।” रवि घबरा गया। उसने तुरंत कहा— “मैं आज ही निकलता हूँ।” लेकिन उसी समय उसके ऑफिस में एक बहुत जरूरी मीटिंग थी। उसने सोचा— “पहले यह काम पूरा कर लेता हूँ। शाम तक निकल जाऊँगा।” शाम हुई, फिर एक और काम आ गया। उसने गाँव जाने का कार्यक्रम अगले दिन पर टाल दिया। अगली सुबह फिर फोन आया। इस ...