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नियमित जीवन पद्धति - Regulated lifestyle

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नियमित जीवन पद्धति - Regulated lifestyle सूर्य नियमित रूप से ठीक समय पर उदित होता है और निश्‍चित समय पर ही अस्त होता है, हम भी अपने जीवन में प्रत्येक कार्य निश्‍चित समय पर करने का अभ्यास करें, अर्थात अपनी जीवन पद्धति नियमित बनायें। सूर्य से हम परोपकार और समानता का व्यवहार सीखें। हमारे भू-मण्डल का सारा कार्य व्यवहार उसी के ऊपर आधारित है। संसार के सभी जीव-जन्तुओं और वनस्पति आदि को उसी से जीवन मिलता है। सूर्य की भांति हमारा जीवन भी संसार के सभी जीव-जन्तुओं का जीवन दाता अर्थात सहारा देने वाला हो। हमारी प्रेरणा से उनके जीवन में नव-जीवन का संचार हो। सूर्य की (जिस प्रकार अपने घरों, सड़कों और मार्गों को हम बार-बार साफ करते हैं फिर भी कई बार उनमें कूड़ा-कर्कट, ईंट-पत्थर या रेत मिट्टी रह जाती है। इसी प्रकार धर्म-मार्ग में भी काम करते समय ईर्ष्या-द्वेष छल-कपट, स्वार्थ और भ्रष्टाचार रूपी कंकर-पत्थर रुकावट डाला करते हैं।) किरणें संसार को रोग के कीटाणुओं से रहित कर देती हैं, ऐसे ही हम वैदिक ज्ञान के प्रकाश द्वारा संसार के अज्ञान रूपी अंधकार को नष्ट करते चले जायें जिससे वैदिक ज्ञान का उदय होता चला जाये...

नैतिक मूल्यों की शिक्षा - Education in moral values

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नैतिक मूल्यों की शिक्षा - आधुनिक वैज्ञानिक यन्त्रों (फेसबुक, इन्टरनेट, चलभाष इत्यादि) से बालकों को एक तरफ उन्नति करने का अवसर मिला है तो दूसरी तरफ उससे नैतिक मूल्यों का पतन हुआ है। बालक के जीवन का सबसे अहम् स्थान स्कूल है। वहाँ का वातावरण सीधा उनके मन पर प्रभाव डालता है। उन्हीं स्कूलों में इन्टरनेट को अनिवार्य घोषित किया जा चुका है। इन्टरनेट पर पढाई के अलावा भी तो नाना प्रकार के अनुचित मार्ग पर ले जाने वाले आकर्षण हैं। इन सबकी वजह से बालकों का जीवन तो अनैतिकता के गर्त में जा गिरा है। ऐसी परिस्थिति में माता-पिता, आचार्य का उत्तरदायित्व होता है कि बच्चों को नैतिक मूल्यों की शिक्षा दें। अच्छे संस्कार देते हुए उनको सदाचार से युक्त, सुयोग्य एवं लायक बनावें। माता निर्माताः भवति माता बच्चे की प्रथम गुरु है। माता को उन्हें कुकर्मों से बचाना होगा, किसी भी अंग से कुचेष्टा न करने पावे ऐसा प्रयास करना होगा। उन्हें सत्यभाषण की आदत डालें, मादक-द्रव्यों से दूर रखें। ऋग्वेद, मण्डल-7, सूक्त-2, मन्त्र-11 का भावार्थः - हे विद्वान! जैसे सूर्य का प्रकाश दिव्य गुणों के साथ नीचे भी स्थित हम सबों को प्राप्त...