दादी की एक थाली: भारतीय संस्कृति का असली मतलब | Hearttouching Story
छोटा था तब मुझे लगता था कि खाना सिर्फ भूख मिटाने के लिए होता है। रोटी, सब्जी, दाल... खाओ और खेलने भाग जाओ। लेकिन दादी की एक थाली ने मेरी सोच ही बदल दी।दादी गांव से थीं। उनके पास न फ्रिज था, न माइक्रोवेव। लेकिन उनके पास समय था। और उस समय से वो संस्कार परोसती थीं।वो थाली कोई आम थाली नहीं थी। स्टील की गोल थाली। बीच में चावल का पहाड़, चारों तरफ कटोरियाँ। एक में दाल, एक में सब्जी, एक में अचार, एक में दही। और सबसे ऊपर केले का पत्ता।मैं पूछता: "दादी, इतनी सारी कटोरी क्यों?" दादी हंसकर बोलतीं: "बेटा, ये षड्रस है। भारतीय संस्कृति कहती है कि भोजन में 6 रस होने चाहिए - मीठा, खट्टा, नमकीन, कड़वा, तीखा, कषाय। तभी शरीर और मन दोनों तृप्त होते हैं।"पहला सबक: संतुलन दादी कभी एक ही सब्जी नहीं बनाती थीं। कहतीं "जैसे जीवन में सुख-दुख दोनों चाहिए, वैसे थाली में भी सब रस चाहिए। सिर्फ मीठा खाओगे तो बीमार पड़ जाओगे।" उस दिन समझ आया कि संस्कृति का मतलब Balance है।दूसरा सबक: सम्मान खाने से पहले दादी थाली के चारों तरफ पानी का गोल घेरा बनातीं। फिर अन्न देवता को प्रणाम। कहतीं "अन...