Posts

सेठ ने किया कृष्ण को बंद! फिर आधी रात को हुआ चमत्कार | Nitin Lakade

Image
 ताले में बंद कृष्ण 😲🔒 एक गांव में एक सेठ रहता था। बड़ा ही कंजूस। उसके घर में एक छोटा सा मंदिर था, उसमें बाल-गोपाल की एक प्यारी सी मूर्ति थी। सेठ रोज सुबह अगरबत्ती घुमाकर चला जाता। पर सेठ को एक अजीब आदत थी। वह अपने सोने के सिक्के भी उसी मंदिर में, कृष्ण की मूर्ति के पीछे छुपाकर रखता था। वह सोचता था - "यहां किसकी नजर पड़ेगी, ये तो पत्थर है।" एक दिन गांव में खबर फैली कि डाकू आने वाले हैं। सेठ घबरा गया। उसने सारे सिक्के समेटे और सोचने लगा - कहाँ छुपाऊं? तभी उसकी नजर मंदिर के छोटे से दरवाजे पर पड़ी। उसमें कुंडी लगी थी। सेठ ने सारे सिक्के मंदिर के अंदर रख दिए, मूर्ति के ठीक सामने। और फिर बाहर से कुंडी लगाकर उस पर एक बड़ा ताला लगा दिया! उसकी पत्नी ने कहा - "अरे! ये क्या कर रहे हो? अंदर कान्हा है, उसे बंद कर दिया?" सेठ हंसा - "अरे पगली, ये पत्थर का है, इसे सांस थोड़ी आती है। ताले में रहेगा तो चोरों से बच जाएगा। मैं तो सिक्कों को बचा रहा हूं।" रात हो गई। डाकू नहीं आए। सेठ चैन से सो गया।पर आधी रात को उसे मंदिर से खट-खट की आवाज आने लगी। जैसे कोई अंदर से दरवाजा पीट...

कड़वा है पर सच है - Nitin Lakade | Kadwa Hai Par Sach Hai

Image
जिंदगी में एक बात हमेशा याद रखना, सच हमेशा कड़वा ही होता है।दोस्तों, आजकल लोग मीठा झूठ सुनना ज्यादा पसंद करते हैं। अगर आप किसी को उसकी गलती पर सच बोलोगे तो वो आपसे नफरत करने लगेगा। यही आज की सबसे बड़ी सच्चाई है। कड़वा है पर सच है - इसका मतलब क्या है? इसका मतलब ये है कि सच सुनने की हिम्मत हर किसी में नहीं होती। लोग तारीफ सुनना चाहते हैं, पर सुधार की बात कोई नहीं सुनना चाहता। अगर आप जिंदगी में आगे बढ़ना चाहते हो तो कड़वी बातों को भी सुनना सीखो, क्योंकि वही आपको आगे ले जाएंगी। आपको क्या लगता है? क्या सच में सच हमेशा कड़वा होता है?  Comment में जरूर बताना।

सबको खुश रखने की कोशिश मत करो | Mahadev Motivation | Nitin Lakade Indore -

Image
🚩  || जय श्री महाकाल ||   🚩 कोशिश - Nitin Lakade, Indore जीवन में हम सबको खुश रखने की कोशिश करते हैं, लेकिन ये संभव नहीं है। भगवान शिव कहते हैं - अपना कर्म करो, सही रास्ते पर चलो। कोशिश - छोटा शब्द है पर इसमें जीवन छुपा है। सबको खुश रखने की कोशिश मत करो, ऐसा करके तुम सिर्फ अपना वक्त बर्बाद करोगे और दूसरों की उम्मीदें बढ़ाओगे। महादेव कहते हैं - कर्म करो, फल की चिंता मत करो। जीवन में 3 बातें याद रखो: कोशिश: कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। सच: हमेशा सच के रास्ते पर चलो। महादेव: जो किस्मत में है, वो महादेव देगा। कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। महादेव भी यही सिखाते हैं। अगर आप सबको खुश करने में लगे रहोगे, तो खुद दुखी हो जाओगे। इसलिए जो सही है, वही करो।  हर हर महादेव! अगर ये बात दिल को छू गई तो Comment में Har Har Mahadev जरूर लिखें।

मिट्टी से पहचान तक - मैं नितिन लकड़े, प्रजापत नगर इंदौर से

Image
नमस्कार, मैं नितिन लकड़े। प्रजापत नगर इंदौर का रहने वाला हूँ। आप सोच रहे होंगे मैं ब्लॉग क्यों लिख रहा हूँ? हम प्रजापत नगर में रहते हैं, स्वच्छ भारत को आकार देना हमारा काम है। मेरे दादा कहते थे - बेटा, मिट्टी कभी खराब नहीं होती, बस उसे सही हाथ चाहिए। यही बात मैं सिरपुर तालाब पर देखता हूँ। लोग उसे गंदा कहते हैं, पर मैं उसमें आने वाले कल का सुंदर इंदौर देखता हूँ। इसीलिए मैंने ये ब्लॉग शुरू किया है।  यहाँ मैं लिखूंगा: प्रजापत नगर की हर छोटी-बड़ी खबर सिरपुर तालाब को बचाने की हमारी कोशिश और रोज एक अच्छी बात जो आपके दिन को अच्छा बना देये सिर्फ मेरा ब्लॉग नहीं है, ये हम सब प्रजापत नगर वालों का ब्लॉग है। अगर आप प्रजापत नगर या सिरपुर तालाब के पास रहते हैं, तो कमेंट में जरूर बताइए। आपका अपना नितिन लकड़े - Nitin Lakade प्रजापत नगर, इंदौर

समग्र आईडी में नाम की गलती कैसे सुधारें

Image
  नमस्कार, मैं नितिन लकड़े, प्रजापत नगर, इंदौर से। पिछले लेख में मैंने बताया था कि नाम गलत होने से जाति प्रमाण पत्र में परेशानी आती है। आज मैं बताऊँगा कि समग्र आईडी में सुधार कैसे होता है। समग्र आईडी में सुधार क्यों जरूरी है ? मध्यप्रदेश में लाड़ली बहना, छात्रवृत्ति और जाति प्रमाण पत्र - सबका आधार समग्र आईडी है। अगर समग्र में नाम गलत है तो कोई भी योजना का लाभ नहीं मिलता। सुधार के लिए क्या करें ? १. समग्र पोर्टल पर जाएं samagra.gov.in पर जाकर समग्र आईडी खोजें। २. आधार से जोड़ें समग्र को आधार से जोड़ने का अनुरोध करें। नाम आधार के अनुसार ही सही होगा। ३. नगर निगम में आवेदन दें अगर ऑनलाइन न हो तो जोनल कार्यालय इंदौर में जाकर सुधार फॉर्म भरें। साथ में आधार कार्ड और अंकसूची लगाएं। ४. समय आमतौर पर सात दिन में समग्र आईडी सुधर जाती है। मेरा सुझाव है कि पहले समग्र, फिर आधार, फिर जाति प्रमाण पत्र - इसी क्रम में सुधार करवाएं। यह जानकारी उपयोगी लगी हो तो इसे साझा करें। नितिन लकड़े - Nitin Lakade प्रजापत नगर, इंदौर

नितिन लकड़े प्रजापत नगर इंदौर - जाति प्रमाण पत्र सुधार की जानकारी

Image
नितिन लकड़े - प्रजापत नगर, इंदौर से नमस्कार, मेरा नाम नितिन लकड़े है और मैं इंदौर के प्रजापत नगर का रहने वाला हूँ। यह ब्लॉग मैंने अपने अनुभव साझा करने के लिए बनाया है।  नाम की गलती से होने वाली परेशानी सरकारी कागजों में नाम की छोटी सी गलती बहुत बड़ी परेशानी बन जाती है। मेरे नाम में लकड़े शब्द को कई जगह लकाड़े लिख दिया गया था। इसी कारण मेरे बच्चों गीतिका और कर्मण्य के जाति प्रमाण पत्र बनने में देरी हुई। मध्यप्रदेश में जाति प्रमाण पत्र कैसे सुधरवाएं ? अगर आपके प्रमाण पत्र में भी नाम गलत है तो आप यह काम कर सकते हैं। पहला चरण - शपथ पत्र बनवाएं आपको तहसील के पास से एक शपथ पत्र बनवाना होगा कि आपका सही नाम नितिन लकड़े है। दूसरा चरण - आवेदन करें एमपी ऑनलाइन या लोक सेवा केंद्र पर जाकर आरएस / ४३९ के तहत सुधार के लिए आवेदन दें। तीसरा चरण - दस्तावेज लगाएं आवेदन के साथ आधार कार्ड, समग्र आईडी और स्कूल की अंकसूची लगाएं। चौथा चरण - जाँच पटवारी द्वारा जाँच के बाद तहसीलदार द्वारा नया प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। समग्र आईडी सुधारना क्यों जरूरी है ? मध्यप्रदेश में सभी योजनाओं का आधार समग्र आईडी ह...

सब कुछ होते हुए भी हम दुखी क्यों हैं? | प्रेरणादायक हिंदी कहानी | जो है उसकी कीमत समझो | Nitin Lakade

Image
शीर्षक: गरीब माली और राजा का सबसे बड़ा सबक एक बहुत बड़े राज्य का राजा था। उसके पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी। विशाल महल, हजारों सैनिक, सोने-चाँदी के खजाने और अनगिनत सेवक—सब कुछ था। लेकिन राजा की एक आदत बहुत खराब थी। उसे लगता था कि दुनिया में पैसे से सब कुछ खरीदा जा सकता है। राजा अक्सर अपने मंत्रियों से कहता— “जिसके पास धन है, उसके पास सम्मान है। जिसके पास धन नहीं, उसका कोई मूल्य नहीं।” मंत्री राजा की हर बात में हाँ मिलाते थे। क्योंकि कोई भी राजा को नाराज़ नहीं करना चाहता था। महल के पीछे एक बहुत सुंदर बगीचा था। उस बगीचे की देखभाल एक बूढ़ा माली करता था, जिसका नाम हरिदास था। हरिदास गरीब था। उसके कपड़े साधारण थे और उसका छोटा-सा घर था। लेकिन वह हमेशा खुश रहता था। वह सुबह सूरज निकलने से पहले बगीचे में पहुँच जाता। फूलों को पानी देता, सूखे पौधों को हटाता और नए पौधे लगाता। वह पौधों से ऐसे बातें करता था, जैसे वे उसके अपने बच्चे हों। एक दिन राजा बगीचे में घूम रहा था। उसने देखा कि हरिदास एक छोटे-से पौधे के पास बैठा मुस्कुरा रहा है। राजा ने पूछा— “हरिदास, तुम्हारे पास न धन है, न बड़ा घर, न कीमती ...