Lal Bahadur Shastri Jayanti : Jai Jawan Jai Kisan Ki Amar Kahani
लाल बहादुर शास्त्री: कद छोटा, पर चरित्र सबसे ऊँचा इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान उनके कद से नहीं, बल्कि उनके चरित्र से होती है। लाल बहादुर शास्त्री जी ऐसे ही व्यक्तित्व थे। मात्र पाँच फीट दो इंच की साधारण काया, सादा पहनावा और शांत चेहरा—लेकिन भीतर ऐसा आत्मबल, जिसने कठिन समय में पूरे भारत का नेतृत्व किया। 2 अक्टूबर केवल महात्मा गांधी जी की जयंती नहीं है, यह उस महान राष्ट्रनायक की जन्मतिथि भी है, जिसने भारत को एक अमर मंत्र दिया— “जय जवान, जय किसान।” सादगी के पीछे की दृढ़ता कहाँ से आई? शास्त्री जी का बचपन अभावों में बीता। 1904 में मुगलसराय में जन्मे लाल बहादुर ने बहुत छोटी उम्र में अपने पिता को खो दिया। इसी दौर में महर्षि दयानन्द सरस्वती की पुस्तक ‘सत्यार्थ प्रकाश’ से उनका परिचय हुआ। आर्यसमाज के विचारों ने उनके जीवन में सत्य, स्वावलम्बन और समानता को दृढ़ किया। सिद्धांतों को जीवन में उतारना - दहेज और इस्तीफा जब उनका विवाह ललिता देवी जी से हुआ, तब उन्होंने दहेज लेने से इनकार कर दिया। केवल एक चरखा और कुछ सूत स्वीकार किया। 1956 में अरियालूर रेल दुर्घटना ...