जब कांवड़ यात्रा में मिल गए महादेव | हर हर महादेव | Nitin Lakade
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सावन का महीना था। इंदौर से उज्जैन तक कांवड़िए "बम-बम भोले" के जयकारे लगाते जा रहे थे। उन्हीं में था राहुल - 22 साल का लड़का, जो पहली बार कांवड़ लेने निकला था।
कंधे पर कांवड़, पैरों में छाले, पर मन में महादेव से मिलने की जिद। रास्ते में तेज बारिश शुरू हो गई। सब कांवड़िए आगे निकल गए, राहुल अकेला पीछे रह गया।
1. वो बूढ़ा बाबा
तभी एक बूढ़ा बाबा आया, लंबी जटाएं, माथे पर भभूत। उसने कहा - "बेटा, थक गया क्या?" राहुल बोला - "बाबा, कांवड़ भारी लग रही है।" बाबा मुस्कुराया - "जिसके मन में भोले हैं, उसकी कांवड़ कभी भारी नहीं होती।"
2. चमत्कार
✨ चमत्कार ✨
बाबा ने जैसे ही कांवड़ उठाई, वो फूल की तरह हल्की हो गई! राहुल ने पीछे मुड़कर देखा तो वहाँ कोई नहीं था। सिर्फ एक रुद्राक्ष और त्रिशूल का निशान था। वो समझ गया - वो खुद महादेव थे!
3. उज्जैन में मिलन
राहुल दौड़ते-दौड़ते महाकाल पहुंचा। जल चढ़ाते ही आंसू बह निकले। उसे लगा जैसे महादेव कह रहे हों - "मैं तो हर कांवड़ में होता हूँ, बस पहचानने वाली नजर चाहिए।"

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