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प्रेम और दया - Love and Compassion

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प्रेम और दया -  Love and Compassion प्रेम और दया का भावना से न केवल आप दूसरों का भला कर सकते है बल्कि इससे स्वयं व्यक्ति का भी कल्याण और मंगल होता है। ये भाव जहाँ पाने वालों को प्रफुल्लित करते है वहाँ बाँटने वाले की चेतना और हृदय का भी परिष्कार करते है। प्रेम और दया ऐसे जीवन मूल्य है जिनके बिना संसार में परिवर्तन सम्भव नहीं। ये उस चन्दन के समान है जो केवल उस माथे को ही शीतल नहीं करते जहाँ लगाया जाता है अपितु लगाने वाले की अंगुलियों को भी सुगन्धित कर देते है। विश्‍वबन्धुत्व का वैदिक उद्घोष का आधार भी यही है कि सभी प्राणी मिल कर चले, मिलकर प्रेम से बोले, मिल कर रहे। प्रेमवत व्यवहार से मनुष्य शत्रु को भी मित्र बना लेता है, कठोर हृदय वाले को भी कोमल हृदय वाला बना देता है और हिंसक प्रवृत्ति वाले व्यक्ति को भी परिवर्तित कर समाज का एक आत्मनिर्भर एवं उपयोगी इंसान बनाया जा सकता है। प्रेम रहित जीवन तो निरा पशु तुल्य है। प्रेम से प्रेम की उपज और घृणा से घृणा की उपज उगती है। अतः मानव को प्रत्येक परिस्थिति में प्यार व सहानुभूति रखते हुए ही जीवनयापन करना चाहिए। प्राचीन व आधुनिक कवियों ने इन भावो...

बच्चे पूरे विश्‍व का भविष्य - Children are the future of the entire world

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बच्चे पूरे विश्‍व का भविष्य -  Children are the future of the entire world  स्वस्थ सामाजिक वातावरण एक बालक के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। परन्तु आजकल का आधुनिक समाज उसी बालक को बाल्य-श्रमिक बनाकर स्वयं को गर्वित महसूस कर रहा है। बाल्य-श्रम पूरे विश्‍व की समस्या हे। बाल्य-श्रम का उद्योगिक-क्रान्ति में भी महत्वपूर्ण स्थान रहा है। बच्चों को बाल्य-श्रमिक बनाने के दो मुख्य कारण हैः- 1. गरीबी और 2. शिक्षा का अभाव। इन दोनों कारणों की वजह से, मजबूरी में, आज लाखों-करोड़ो की संख्या में इन मासूम एवम् सरल बच्चों से हानिकारक रासायनिक पदार्थों के मध्य काल-कारखानों में, घरों में, चाय दुकानों में, ढाबा में, तरह-तरह के अत्याचारों को सहन करते हुए काम करवाया जा रहा है। बच्चे पूरे विश्‍व का भविष्य हैं। उन्हें कितनी जिम्मेदारियां सम्हालनी हैं- परिवार की, समाज की, राष्ट्र की एवं विश्‍व की भी। अगर बचपन में ही बाल्य-श्रमिक बन जायेंगे तो कैसे अच्छे तथा प्रतिष्ठावान नागरिक बन पायेंगे। भारत में के स्वयं  सेवी इस समस्या का समाधान निकालने की चेष्टा तो कर रहे हैं। परन्तु सरकार का भी उत्तरदायित्व है कि ग...

नैतिक मूल्यों की शिक्षा - Education in moral values

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नैतिक मूल्यों की शिक्षा - आधुनिक वैज्ञानिक यन्त्रों (फेसबुक, इन्टरनेट, चलभाष इत्यादि) से बालकों को एक तरफ उन्नति करने का अवसर मिला है तो दूसरी तरफ उससे नैतिक मूल्यों का पतन हुआ है। बालक के जीवन का सबसे अहम् स्थान स्कूल है। वहाँ का वातावरण सीधा उनके मन पर प्रभाव डालता है। उन्हीं स्कूलों में इन्टरनेट को अनिवार्य घोषित किया जा चुका है। इन्टरनेट पर पढाई के अलावा भी तो नाना प्रकार के अनुचित मार्ग पर ले जाने वाले आकर्षण हैं। इन सबकी वजह से बालकों का जीवन तो अनैतिकता के गर्त में जा गिरा है। ऐसी परिस्थिति में माता-पिता, आचार्य का उत्तरदायित्व होता है कि बच्चों को नैतिक मूल्यों की शिक्षा दें। अच्छे संस्कार देते हुए उनको सदाचार से युक्त, सुयोग्य एवं लायक बनावें। माता निर्माताः भवति माता बच्चे की प्रथम गुरु है। माता को उन्हें कुकर्मों से बचाना होगा, किसी भी अंग से कुचेष्टा न करने पावे ऐसा प्रयास करना होगा। उन्हें सत्यभाषण की आदत डालें, मादक-द्रव्यों से दूर रखें। ऋग्वेद, मण्डल-7, सूक्त-2, मन्त्र-11 का भावार्थः - हे विद्वान! जैसे सूर्य का प्रकाश दिव्य गुणों के साथ नीचे भी स्थित हम सबों को प्राप्त...

मनुष्य ईश्‍वर की अनमोल कृति - Man is Gods Precious Creation

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मनुष्य ईश्‍वर की अनमोल कृति Man is Gods precious creation जो बीत चुका है, उस पर विलाप करने से क्या लाभ और जो अभी उपस्थित नहीं है उसकी कल्पना के जाल क्यों बुनना? माह बीत जाता है कैलेण्डर से पन्ना फाड़ देते हैं, वर्ष बीत जाता है तो कैलेण्डर को ही हटा देते हैं, लेकिन व्यक्ति अपने भीतर पलने वाली उत्तेजना को, अनर्गल विचारों को, दूसरों के प्रति होने वाले वैमनस्य को हटा नहीं पाता। यह भय और आशंका हमारे साहस, आत्मविश्‍वास व इच्छाशक्ति को नष्ट कर देती है। इस तरह की किसी भी समस्या का समाधान उसका मूल कारण जानकर ही हो सकता है। मनुष्य ईश्‍वर की अनमोल कृति है। ईश्‍वर ने उसे हर समस्या एवं आपदा से लड़ने के लिए मन-मस्तिष्क, हाथ-पैर प्रदान किए है। अतः मनुष्य को उपयोगिता ज्ञात होनी चाहिए। जीवन को वापस प्राप्त कीजिए, यह बहुत बड़ी चुनौती है हमारे सामने। अमावस्या की अंधेरी रात हो, एक हाथ में सूई हो और दूसरे हाथ में धागा हो, अचानक बिजली चमके और हम सावधान रहकर सूई में धागा पिरो दे, ऐसी यह चुनौती है। हमें इसे स्वीकारना ही होगा। - Nitin Lakade - Prajapat Nagar, Indore

सकारात्मक सोच का मंत्र - Positive Thinking Mantra

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सकारात्मक सोच का मंत्र Positive Thinking Mantra महत्वकांक्षा व्यक्ति के जीवन में प्राण और शक्ति का संचार करती है, उसे क्रियाशील बनाती है तथा संघर्ष के लिए प्रेरणा देती है। ईश्‍वर उन्हीं का साथ देते हैं, जो मजबूत संकल्प से धनी होते हैं। चट्टान मजबूत होती है, पर इसे लोहा तोड़ देता है। सकारात्मक सोच एक ऐसा मंत्र है जिससे चुटकियों में ही व्यक्ति तनावमुक्त हो सकता है। ध्यान रखिए, आप नकारात्मक सोच से दूर हटकर सकारात्मक विषयों पर ध्यान केन्द्रित करके ही भय, आशंका, चिंता से मुक्ति पा सकते हैं। ईश्‍वर में आस्था रखों यह शब्द आपके जीवन को रोशन कर सकते हैं। इसमें एक ऐसी विद्यमान है, जिसे आप सहज ही अनुभव कर सकेंगे। भूखण्ड के दोष के कारण नाना प्रकार के प्रभाव आते हैं। भूखण्ड के दोष मन्दिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, कोठी, मकान, फ्लैट, कल-कारखाने सबको प्रभावित करते हैं। आइए हमारा साथ लीजिए, आपके विजय रथ को आगे बढाने में हम आपके सहयोगी बने। आशा सकारात्मक विचार की सूचक है। आशावान व्यक्ति का मन सफलता, सम्पन्नता और सुखमय जीवन का संदेश ग्रहण करता है। इसी से वह अपने लक्ष्य को पाने में सफलता प्राप्त करता है। बीते क...

एक रात बाइक पर घूमने निकला | Nitin Lakade Prajapat Nagar Indore - नितिन लकड़े इंदौर

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एक रात बाइक पर घूमने निकला इंदौर बायपास की वो रात - 2:17 AM 🏍️ 🌙 🛣️ रात के 12 बजे थे। घर में मन नहीं लग रहा था। मैंने अपनी पुरानी Pulsar निकाली और सोचा - चलो, थोड़ा इंदौर बायपास का चक्कर लगा आते हैं। हेलमेट पहना, और निकल पड़ा अकेला। सड़क खाली, ठंडी हवा, और बाइक की आवाज - मजा आ रहा था। रिंग रोड से होते हुए मैं रालामंडल की तरफ निकल गया। 1. सुनसान सड़क पर एक लड़का रालामंडल घाट पर पहुंचा तो देखा, एक 10-12 साल का लड़का हाथ दे रहा है। रात के 1:30 बजे, जंगल में बच्चा? मैंने बाइक रोकी। मैं बोला - "क्या हुआ छोटे, यहाँ क्या कर रहा है?" वो बोला - "भैया, मेरी साइकिल पंचर हो गई, घर छोड़ दोगे?" मुझे अजीब लगा, पर इंसानियत के नाते मैंने कहा - बैठ जा। वो पीछे बैठ गया। पर 2 मिनट बाद मुझे लगा - पीछे वजन ही नहीं है! शीशे में देखा तो पीछे कोई नहीं था! 🏍️ शीशे में कोई नहीं... फिर बाइक भारी क्यों चल रही है? 🏍️ 2. असली ट्विस्ट मैंने घबराकर बाइक तेज की। तभी पीछे से आवाज आई - ...

पार्टी में धूम मचा दी! | Nitin Lakade Indore - नितिन लकड़े इंदौर

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पार्टी में धूम मचा दी! 💃🕺 इंदौर के बबलू की शादी की वो रात 🎉 🎧 🎂 इंदौर के स्कीम नंबर 78 में बबलू की शादी की पार्टी थी। DJ लगा था, लाइटें चमक रही थीं, पर डांस फ्लोर खाली पड़ा था। सब लोग खाने में बिजी थे। बबलू का दोस्त पप्पू कोने में खड़ा होकर बोर हो रहा था। 1. एंट्री हुई हीरो की तभी पप्पू ने अपना चश्मा निकाला, जेब से रुमाल निकाला, और सीधा DJ के पास गया। उसने कान में कुछ कहा। DJ ने मुस्कुराते हुए गाना बजाया - "काला चश्मा!" पप्पू ने चश्मा पहना और बोला - "भाईयो और बहनो, खाना बाद में, पहले धूम मचाते हैं!" 2. फिर क्या था... पप्पू ने ऐसा डांस शुरू किया कि सब प्लेट छोड़कर देखने लगे। कभी नागिन डांस, कभी ब्रेक डांस! उसकी देखा-देखी छोटे बच्चे भी कूद पड़े, फिर आंटियां भी, फिर अंकल भी! 🤣 5 मिनट में पूरा हॉल डांस फ्लोर बन गया! 🤣 बुफे वाला भी चम्मच बजाकर नाचने लगा! बबलू खुद दूल्हे के कपड़ों में ही स्टेज पर आ गया। दुल्हन भी हँसते-हँसते ताली बजा रही थी। 3. असली धूम ...